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शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

बाल कहानी :- ट्रेज़र हंट

 

शाम के पाँच बजते ही संजू ,सोनू और अभि  ने अपने घर से निकल कर सड़क के मोड़ पर बनी पुलिया की और दौड़ लगा दी। स्कूल से आने के बाद से ही वे सब पाँच  बजने का इंतज़ार करते हैं, ताकि अपने दोस्तों के साथ खेलने जा सकें।  
कॉलोनी में लाइन से मकान बने हैं कहीं भी खेलने की जगह नहीं है। एक मंदिर के आसपास कुछ खाली जगह है जरूर जहाँ कॉलोनी की  महिलाएँ अपने बच्चों को लेकर आती हैं या बुजुर्ग लोग बैठ कर गपशप करते हैं। वहाँ खेलने पर कोई न कोई उन्हें शोर या उछाल कूद ना करने कि नसीहत देते रहते हैं  जो उन्हें पसंद नहीं है। इसलिए ये लोग यहाँ पुलिया पर बैठ कर बाते करते हैं।  
तीनो लगभग साथ ही पुलिया पर पहुँचे और एक दूसरे को हाई फाई करते हुए मिले। दोस्तों से मिलने कि ख़ुशी उनके चेहरे पर चमक रही थी। 
पुलिया पर बैठते ही संजू ने कहा  "अरे रिंकू नहीं आया ?"रिंकू सोनू के घर की तरफ ही रहता है। 
"पता नहीं मैं तो सीधे ही आ गया मुझे तो वह दिखा  भी नहीं ,"सोनू ने कहा।
"आज क्या करना है" अभि ने पूछा जैसे शाम को मिलकर खेलने का कोई लक्ष्य होता है। 
"आज क्या करें यार कहीं खेलने की भी जगह नहीं है यहीं बैठ कर बातें करते हैं। "सोनू ने कहा। 
" तुम लोगों ने वो पानी कि टंकी की तरफ एक मकान देखा है जो खाली पड़ा है ?" संजू ने पूछा।  
"कौन सा मकान ?"
अपनी कॉलोनी के पीछे जो बड़ी पानी कि टंकी है न उसी लाइन में एक बड़ा सा बंगला है कल मैं भैया के साथ उस रोड़ से निकला था तब मैंने देखा था। संजू ने विस्तार से बताया। 
"हाँ होगा तो ?"अभि अब ऊबने लगा था। 
"बहुत बड़ा बंगला है खाली पड़ा है उसके आस पास बहुत सारे पेड़ हैं किसी पुराने किले जैसा लगता है। "
"यार संजू बोर मत कर। हमें क्या करना है खाली मकान से ?" अभि ने थोडा चिढ़ कर कहा।  
"अरे सुन तो अपन उस मकान में चलते हैं ट्रेज़र हंट खेलेंगे मज़ा आएगा।"
"ट्रेज़र हंट वो कैसे ?"सोनू थोडा उत्सुक हो आया।  
"देख रिंकू को भी बुला लेते हैं फिर हममे से एक वहाँ कोई चीज़ छुपायेगा फिर उस जगह और चीज़ के लिए तीन हिंट देगा और उन हिंट के अनुसार बाकि लोग उस ट्रेज़र को ढूंढेंगे।"
"यार लेकिन रिंकू क्यों नहीं आया अभी तक ?"सोनू ने रास्ते को देखते हुए कहा।  
"चलो ना उसके घर चलते हैं उसे ले आयेंगे। "संजू बोला। 
थोड़ी देर देखते हैं शायद वो आ जाये , लेकिन ट्रेज़र हंट में हम छुपायेंगे क्या ? अभि को भी अब उत्सुकता होने लगी।  
"देखो हमारे पास कुछ तो होगा जिसे ट्रेज़र बनाया जा सके जैसे कहते हुए संजू ने सोनू कि कलाई पर बंधी घडी की ओर इशारा किया , अगर संजू घडी छुपाता है तो इसके लिए तीन हिंट देगा ,ये गोल है इसे पहनते हैं या समय बताती है फिर दो हिंट देंगे कि ये किस दिशा में है या किस झाड़ी या चीज़ के पास है। "
"यार वो तो ठीक है लेकिन अगर तुम लोग मेरी घडी नहीं ढूँढ सके तो ? घड़ी  गुमने पर मम्मी मुझे बहुत मारेंगी।"  सोनू ने मायूसी से कहा।
"अरे बुद्धू तो तुझे तो पता होगा ना कि तूने घडी कहाँ छुपाई है हम उसे वहाँ से उठा लेंगे। " अभि ने हँसते हुए सोनू को एक चपत लगाईं।  
सोनू झेंप कर सिर खुजाते हुए मुस्कुराने लगा।  
तभी रिंकू दौड़ते हुए वहाँ आया और हाँफते हुए बोला "सॉरी यार आज मेथ्स का बहुत सारा होमवर्क था मम्मी ने कहा पूरा करके ही खेलने जाना इसलिए देर हो गयी। "
"चलो अब टाइम वेस्ट नहीं करते हैं" कहते हुए अभि और सोनू पुलिया से उतर गए और बोले चलो रेस लगाते हैं और संजू के बताये खाली बंगले की ओर दौड़ पड़े , उनके साथ संजू और रिंकू ने भी दौड़ लगा दी। 
थोड़ी ही देर में वे चारों उस बंगले के सामने थे बंगले का गेट बंद था उस पर ताला लगा था।  सामने झाड़ियों ने बेतरतीब जंगल का रूप ले लिया था।  कुछ सूखी जंगली बेलें छत तक फैली थीं।  पोर्च में धूल की मोटी पर्त जमी थी।  छत तक जाने वाली सीढ़ियाँ बाहर से ही थीं। बंद दरवाज़ों खिडक़ियों पर धूल जमी थी। पोर्च से होकर मकान के पीछे जाने का रास्ता था।  
"यहाँ क्यों आये हैं ?" रिंकू ने उत्सुकता से पूछा उसे अपने देर से आने पर अफ़सोस हो रहा था, पता नहीं दोस्तों ने क्या प्लानिंग कर ली है। 
"पहले अंदर चलते हैं " संजू ने चारों तरफ देखते हुए कहा अभी यहाँ कोई नहीं है और गेट पर चढ़ कर अंदर कूद गया। उसके पीछे पीछे सनी अभि और रिंकू भी अंदर चले गए।  
अंदर आकर सबने बंगले को चारों ओर से देखा। वह एक पुराना बंगला था जो बहुत समय से बंद पड़ा था। धूल , जाले,  पुराने सूखे पेड़  और पत्तों से अटा पड़ा था। सीढ़ियों के नीचे कुछ कबाड़ पड़ा था।  वे सभी सावधानी से एक दूसरे का हाथ पकड़ कर पोर्च से होते हुए बंगले के पीछे तरफ गए, वहाँ भी धूल ,जाले और कचरा पड़ा था। 
"यहाँ कोई भूत तो नहीं होगा ना ?"रिंकू ने फुसफुसाते हुए पूछा तो सभी कि रीढ़ कि हड्डी में सिरहन सी दौड़ गयी। 
"अरे भूत वूत कुछ नहीं होता ," संजू ने हिम्मत बटोर कर कहा। सबने धीमे से सिर हिलाया  लेकिन फिर भी सबकी आँखों में डर बना रहा।  
बंगले के पीछे थोडा अँधेरा सा था, अभि ने कहा "चल सामने चलते हैं यहाँ तो कुछ नहीं है। "

सामने आकर सबने रिंकू को खेल समझाया ,पहले दाम कौन देगा इसका फैसला ताली से किया गया अभि पर दाम आया।  
संजू ,रिंकू और सोनू दीवार की तरफ मुँह करके खड़े हो गए। अभि ने अपनी जेबों को टटोला उसकी जेब में दस रुपये का सिक्का था उसने सिक्का मुठ्ठी में दबाया और चारों तरफ छुपाने की जगह देखने लगा।  सिक्का छुपा कर बोला ओवर। 
अभि को अब ट्रेज़र हिंट देना था। पहला हिंट उसने दिया 'उस चीज़ को देकर आप कुछ भी खरीद सकते हो।' दूसरा हिंट था,'वह किसी सामान के नीचे है 'और तीसरा हिंट था किसी तिरछी चीज़ के नीचे है।' 
संजू ,रिंकू और सोनू सोचने लगे , कुछ खरीद सकते हैं मतलब पैसे ,नहीं नहीं रुपये यार आजकल पैसों में तो कुछ आता ही नहीं है।  मतलब वह चीज़ रुपये है।  
सोनू बोला ,"एक ,दो ,पाँच ,दस सभी रुपये हैं पर सिक्का है या नोट ?" उन्होंने अभि को देखा उसने कंधे उचका दिए।  
"चल छोड़ न यार नोट या सिक्का ढूँढ लेंगे। "संजू बोला "दूसरा हिंट देखो किसी सामान के नीचे, सामान कौन सा ?" 
"देख सीढ़ी के नीचे खाली डिब्बे पड़े हैं." रिंकू बोला।
"और हाँ सीढ़ियाँ तिरछी भी हैं ,"सोनू ख़ुशी से चिल्लाया। 
तीनों तेज़ी से सीढ़ियों के नीचे भागे और सावधानी से एक एक डब्बा उठा कर देखने लगे ,एक गत्ते के डब्बे के नीचे उन्हें सिक्का मिल गया वे सिक्का उठा कर ख़ुशी से कूद कूद कर चिल्लाने लगे।  
तभी सोनू ने कहा ,"यार चिल्लाओ मत अगर मकान में भूत होगा तो जाग जायेगा। "
"हाँ हाँ उठा कर बाहर आएगा और तुझसे चाय नाश्ता मांगेगा। "अभि ने कहा।  
"यार चाय तो है नहीं हम सोनू को ही दे देंगे भूत इसका नाश्ता कर लेगा इतने में उसका पेट भर जायेगा। "संजू ने हँसते हुए कहा।  
"ऐसे मज़ाक मत कर यार मुझे डर लगता है , मैं जा रहा हूँ। "सोनू ने नाराज़गी से कहा।  
"अरे चलो खेलते हैं बातें मत करो। अब किसका दाम है ?"

रिंकू का दाम था उसने अपनी जेबें टटोलीं और छुपाने की जगह ढूँढने लगा. ट्रेज़र छुपा कर वह जल्दी से बाहर आया और बोला ओवर।  
पहला हिंट था वह चीज़ प्लास्टिक और लोहे से बनी है ,दूसरा वह किसी लकड़ी की बड़ी सी चीज़ के नीचे है और तीसरा वह थोड़े अँधेरे में है।  
संजू ,सोनू और अभि सिर खुजाने लगे। प्लास्टिक और लोहे से क्या बनता है ?चाक़ू ,हट यार रिंकू क्या जेब में चाक़ू रख कर घूमता है ? 
"फिर क्या होगा ?"
"चम्मच जिसका हैंडल प्लास्टिक का हो।"
"नहीं यार कुछ और सोचो। "
"दूसरा हिंट क्या है ?" 
"लकड़ी कि बड़ी सी चीज़ ,खिड़की नहीं दरवाज़ा मतलब दरवाज़े के नीचे। "
तीसरा हिंट है अँधेरे में। अँधेरा तो पीछे है यहाँ सामने तो धूप आ रही है अभी। "
तीनों पीछे भागे,"हाँ देख पीछे भी लकड़ी का बड़ा सा दरवाज़ा है इसके नीचे। "
"यार संजू नीचे से कैसे निकालेंगे कोई कीड़ा या छिपकली हुई तो ?"सनी ने डरते हुए कहा।  
"अभि एक लकड़ी ले कर आना तो। "लकड़ी से दरवाज़े के नीचे टटोलते हुए कुछ अंदर को सरक गया।  
"हट यार कुछ था लेकिन अंदर चला गया थोड़ी बड़ी लकड़ी लाना पड़ेगी। " 
अभि एक बड़ी लकड़ी ढूँढ लाया।  संजू ने सावधानी से लकड़ी को अंदर से बाहर किया तो एक शार्पनर बाहर आया।  
" हे मिल गया ट्रेज़र "सोनू चिल्लाया।  
संजू ने लकड़ी बाहर निकाली उसके साथ एक सोने कि चेन भी बाहर आ गयी।  
" ऐ देख ये क्या है चेन सोने की है क्या ?"संजू ने सभी को दिखाते हुए कहा। 
"हाँ हाँ सोने की लगती है , रिंकू तूने सोने की चेन छुपाई थी क्या ?"अभी ने पूछा। 
"नहीं मैंने तो शार्पनर छुपाया था."
"फिर ये चेन किसकी है ?"संजू ने पूछा।  
"लगता है जो यहाँ रहता होगा उसकी होगी। "
"कोई अपनी सोने कि चेन ऐसे फर्श पर क्यों छोड़ेगा ?"
"ए संजू देख इस दरवाज़े पर तो ताला लगा है। "अभि ने ताला दिखाते हुए कहा।  
"लेकिन ताला तो आगे वाले दरवाज़े पर भी है फिर पीछे के दरवाज़े पर भी ताला क्यों ?"
"कहीं ऐसा तो नहीं कोई गड़बड़ हो ?"रिंकू बोला। 
"कैसी गड़बड़ ?" तीनों एक साथ बोले।  
"देख ये ताला नया है इस पर बहुत ज्यादा धूल भी नहीं है , लगता है कोई पीछे के रास्ते से यहाँ आता होगा " रिंकू ने सोचते हुए कहा। 
"कौन ,चोर ! "तीनों एक साथ चीख पड़े।  चारों ने एक दूसरे को देखा और वहाँ से भागे गेट पर चढ़ कर सड़क पर आये ही थे तभी उन्हें सामने दो मोटर बाइक पर आते चार पुलिस के जवान दिखे।  
चार लड़कों को यूँ घबराया देख कर वे वहाँ रुक गए ,"क्या हुआ बच्चों तुम लोग ऐसे घबराये हुए क्यों हो ?"
"पुलिस अंकल ,संजू ने थूक निगलते हुए कहा हम लोग इस खाली बंगले में खेल रहे थे वहाँ हमें ये चेन मिली। "संजू ने हाथ आगे बढ़ाया लेकिन वह खाली था। 
"कहाँ गयी चेन ?"चारों एक दूसरे का मुँह देखने लगे लगता है कहीं गिर गयी।  
पुलिस अंकल ने संजू को ऊपर से नीचे तक देखा और बोले ,"बेटा पुलिस से मज़ाक करना ठीक नहीं है। "
"नहीं अंकल मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ सच में चेन थी लगता है कहीं गिर गई। "
तब तक अभि और रिंकू बंगले के गेट तक जाकर देखने लगे ,गेट के अंदर थोड़ी ही दूर पर चेन पड़ी थी। 
"वह रही चेन कह कर अभि गेट पर चढ़ कर अंदर चला गया और चेन उठा लाया।  
पुलिस के जवानों ने चेन देखी वह वाकई सोने की थी ,"ये तुम्हे कहाँ से मिली ?" 
संजू ने अपना खेल और ट्रेज़र ढूँढने से चेन मिलने तक की सारी कहानी पुलिस के जवानों को कह सुनाई। दो पुलिस के जवान संजू को लेकर अंदर गए।  संजू ने उन्हें वह दरवाज़ा , लकड़ी और रिंकू के हाथ से छूटा शार्पनर भी दिखाया। दरवाज़े पर लगे ताले की चमक और बंगले कि दीवारों पर जमी धूल कि परत को देख कर जवान सोच में पड़ गए।  उन्हें यकीन होने लगा कि कुछ तो गड़बड़ है।  
बाहर आ कर उन जवानों ने थाने फोन करके और पुलिस बल बुलवाया।  अँधेरा होने लगा था ,चारों बच्चों को सुरक्षित घर पहुँचाना जरूरी था।  एक जवान ने उन चारों का नाम पता डायरी में लिखा और दो जवानों से दोनों मोटर बाइक पर चारों को घर छोड़ आने को कहा।  बाकी दो जवान बंगले से कुछ दूर खड़े हो कर उस पर नज़र रखते हुए पुलिस बल के आने का इंतज़ार करने लगे।  

दूसरे दिन अखबार के पहले पन्ने पर बड़े बड़े अक्षरों में खबर छपी थी"खाली बंगले से लाखों का चोरी का सामान बरामद। " 
संजू ने अपने मां पापा को सारी घटना बता दी थी ,सुबह संजू के पापा ने उसे खबर पढ़ कर सुनाई।  
संजू का बहुत मन था कि वह अपने दोस्तों को वह खबर बताये लेकिन अभी तो स्कूल जाना था उनसे मिलने का समय ही नहीं था।  
शाम को जब वह घर आया मम्मी पापा को कहीं जाने के लिए तैयार पाया उन्होंने उसे भी जल्दी से तैयार होने को कहा।  
"हम कहाँ जा रहे हैं ?"संजू ने पूछा वह अपने दोस्तों से मिलना चाहता था लेकिन पापा ने कहा कि उसका साथ जाना जरूरी है जल्दी से तैयार हो जाये।  

एस पी ऑफिस में अभि ,रिंकू और सोनू भी अपने मम्मी पापा के साथ मौजूद थे।  एस पी साहब ने खुद चारों बच्चों को उनकी सतर्कता और पुलिस को खबर देने की उनकी अकलमंदी पर उन्हें बधाई दी चारों का फूलों के गुलदस्ते से अभिनन्दन किया गया वहाँ मौजूद पत्रकारों ने उनके फ़ोटो लिए और उनसे पूरी घटना का ब्यौरा लिया।  
जाते जाते एस पी साहब ने चारों को फिर बधाई देते हुए कहा ,"आगे से वे सावधान रहें और किसी अनजान सुनसान जगह पर अकेले ना जाएँ ये खतरनाक भी हो सकता है। "
अगले दिन सारा शहर अपने इन ट्रेज़र के बारे में जान चुका था।   
कविता वर्मा 

 






 
 


5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (04-01-2014) को "क्यों मौन मानवता" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1482 में "मयंक का कोना" पर भी है!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. वाह...बहुत बढ़िया और रोचक कहानी......आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

    नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो

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