कहानी Kahani

सोमवार, 19 सितंबर 2022

दौड़

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  सुबह गहरी धुंध में लिपटी थी उसमें भीगे पेड़ ठिठुरे से खड़े थे। सूरज भी कोहरे की चादर में लिपटा मानों उजाला होने और धूप निकलने का इंतजार कर...
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गुरुवार, 8 सितंबर 2022

पौने तीन मिनट

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  पौने तीन मिनट  चौराहे के समीप आते-आते वैभव ने सामने सिग्नल पर नज़र डाली मात्र पाँच सेकंड बचे थे उसे लाल होने में उसने बाइक की गति बढ़ा दी ल...
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बुधवार, 7 सितंबर 2022

कड़वी सच्चाई

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  अनिल ऑफिस से घर आया तो देखा गली में लोगों की भीड़ लगी थी। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लोग झुंड बनाकर खड़े थे। धीमे धीमे स्वर में होने वाली बातचीत ...
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रविवार, 4 सितंबर 2022

उल्टी गंगा

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  विभा ने इधर-उधर देखा कमरे से बाहर झांका। सासू माँ बाहर के कमरे में रामनामी ओढ़े तखत पर बैठी माला जप रही थीं। कामवाली रसोई के पीछे आंगन में...
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शनिवार, 27 अगस्त 2022

पगड़ी

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 घर में मेहमानों की आवाजाही बढ़ गई है। कार्यक्रम की रूपरेखा बन रही है कौन जाएगा कैसे जाएगा क्या करना है कैसे करना है जैसी चर्चाएं जोरों पर ह...
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शनिवार, 13 अगस्त 2022

बड़ा नहीं हुआ गोलू

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  सुनंदा ने खिड़की से झांक कर देखा गोलू पार्क में अकेला उदास बैठा था। यह रोज का क्रम बन गया था गोलू रोज ही स्कूल से आकर पार्क में बैठा रहता।...
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शुक्रवार, 29 जुलाई 2022

अंतस की नदी

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  तीखी धूप की तपिश ने तन मन झुलसा दिया। कहीं एक पेड़ की छाँव भी नहीं कैसी दशा हो गई है मेरी ? क्या करूँ सिसक पड़ी थी मैं यह सोचकर। मैं कान्ह...
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kavita verma
जन्म और कर्मस्थली इंदौर ,बहुत सालों तक अध्यापन के बाद अब लेखन को समर्पित ,कई प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख ,लघुकथाएं , कहानियाँ और कविताओं का प्रकाशन . पढ़ने की अभिरुचि ब्लॉगजगत तक खींच लाई,इसके विराट स्वरुप ने लेखन की चाह को विस्तार दिया,और जिस उन्मुक्त ह्रदय से इसने मुझे अपनाया, सराहा, मैं अभिभूत हुई। नाम है कविता वर्मा,मन की बाते, विचार, उलझने जो किसी से न कह पाई वही शब्दों के रूप में निकल कर कहानियों में समां गयी ....ब्लॉग ने कुछ न कह पाने की पीड़ा को बखूबी सहलाया ,और मन की कही अनकही बाते यहाँ उंडेल कर मैं भारहीन हो कर उन्मुक्त आकाश में उड़ चली... कहानी संग्रह 'परछाइयों के उजाले ' को अखिल भारतीय साहित्य परिषद राजस्थान से 'सरोजिनी कुलश्रेष्ठ कहानी संग्रह पुरस्कार ' से प्रथम पुरस्कार। कहानी संग्रह 'कछु अकथ कहानी' को मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन भोपाल से 2020 का वागीश्वरी पुरस्कार उपन्यास छूटी गलियाँ उपन्यास अब तो बेलि फैल गई।
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